Links
 
 
 
  Mandir Darshan--Ek Jhalak
Slideshow Image 1 Slideshow Image 2 Slideshow Image 3 Slideshow Image 4 Slideshow Image 5 Slideshow Image 6

इस मंदिर जी में वर्तमान में १६३ मूर्तिया है, जिनमे चांदी, मूंगा, स्फटिक मणि, स्लेट, पाषाण, कसौटी, संगमरमर तथा श्याम श्वेत पाषाण की है जो क़ि १ इंच से लेकर ५ फीट ६ इंच अवगाहना की खडगासन तथा पदमासन एवं त्रिकाल चौबीसी के साथ विराजमान हैं | जिनमें एक मूर्ती सहस्त्र फणी भगवान पार्श्वनाथकी हैजो क़ि श्यामवर्ण की है ! श्री मंदिर जी में कुल ६ वेदियां एवं एक कलापूर्ण समवशरण है जिसमें स्वर्ण चित्रकारी का काम अत्यधिक कलाविज्ञ कलाकारों द्वारा सोने की कलम से बहुत ही बारीकी से किया गया है ! श्री मंदिर जी के गुम्बद के भीतरी भाग में सोने की कारीगरी एवं खम्बों पर कांच की ज़डाई का कार्य देखते ही बनता है जिसमें असली नगीनों एवं प्राकृतिक रूप से तैयार किये रंगों का उपयोग किया गया है जो अत्यधिक आकर्षक , कलापूर्ण एवं दर्शनीय है जो की भारतवर्ष में अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता है !

श्री मंदिर जी के बींचो बीच एक विशाल चौक है | चौक के दो ओर विशाल तिवारे है जिनमे स्वर्ण ज़डित एवं प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके, दिगम्बर जैन तीर्थ क्ष॓त्रों की एवं पौराणिक कथाओं एवं तीर्थकरों के जीवन से जुड़े पांचों कल्याणकोका चित्रण बड़ी मोनोज्ञता से किया गया है |श्री मंदिर जी के एक ओर एक विशाल सरस्वती भवन है जिसे शास्त्र सभा भवन भी कहते है जो क़ि अपने आप में विशालता लिए हुए अपने स्वर्णमयी अस्तित्व को अनूठे रूप में बनाये हुए है जिसकी चित्रकारी देखते ही मंत्रमुग्ध कर देती है | इसके बाई ओर तीर्थकरों के जन्म से पूर्व माता को आये १६ स्वप्नों का एवं दूसरे द्वार के ऊपर पंचमकाल के शुरुआत में चन्द्रगुप्त मौर्य के १६ स्वप्न जो क़ि पंचमकाल में होने वाले परिवर्तनों के सूचक है, का चित्रण बड़े ही भावपूर्ण तरीके से किया है |

सभा भवन के सामने वाली दीवार पर तीर्थकर श्री आदिनाथ जी को राजा श्रेयांस द्वारा प्रथम आहार इच्छुरस का दृश्य बड़े ही सुन्दर रूप से चित्रित है एवं पास में सुकुमाल मुनि के जीवन चरित्र पर आधारित चित्र बहुत ही मनोज्ञता से चित्रित किया गया है | श्री मंदिर जी के सरस्वती भवन में जो भाव चित्र बने हुए है उनके चित्रण की ३०० वर्ष प्राचीन ४५ मूल प्रतियां जो की सोने की बारीक कलम एवं प्राकृतिक रंगों के द्वारा बनाई गई हैं, उनका भी संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य श्री मंदिर जी में चल रहा है | इन चित्रों के आधार पर ही श्री मंदिर जी के भाव चित्रों का निर्माण हुआ था | श्री मंदिर जी के बाहरी भाग में पाषाण पर तराशे गये सुन्दर एवं कलापूर्ण विभिन्न प्रकार के बेल-बूटे तथा पाषाण में खुदाई का ऐसा सुन्दर कार्य है जो अन्यत्र कहीं नहीं है | इसके ऊपरी भाग में सुंदर एवं कलापूर्ण बारादरी भी है जो की मंदिर जी के प्रवेश द्वार से ही देखी जा सकती है | इसके अलावा भी मंदिर जी में चूना, पत्थर, अराइज एवं संगमरमर एवं कुंदन जड़ाव आदि का कार्य भी मंदिर जी की शोभा में चार चाँद लगाए हुए है | जो भी श्रद्धालु यात्री एवं दर्शनार्थी अवलोकन हेतु पधारते है वे मुक्त कंठ से इसकी सुन्दर, स्वर्णमयी और अद्दभुत चित्रकारी क़ि प्रशंसा करते नहीं थकते है !

समवशरण में विराजमान मूलनायक श्री १००८ भगवान पार्श्वनाथजी की मूर्ति की छठाअद्दभुत निराली है जो की देखते ही बनती है ! इस मूर्ति को तीन अलग-अलग समय में देखने पर मूर्ति की छवी अलग-अलग वर्णों क़ि दिखलाई देती है ! रात्री में यहाँ देव भी दर्शनाथ आते है, तथा रात्री में मंदिर जी में अद्दभुत आभास आज भी होता है ! जनश्रुति प्रचलित है क़ि जो कोई शुद्ध मन, वचन एवं काय से भक्ति पूर्वक चिंतामणि पार्श्वनाथ का नियम से दर्शन करता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है, आत्मा के भाव उज्जवल होते हैं, मन की एकाग्रता बढती है और ह्रदय आनंद विभोर हो जाता है! यह विशाल एवं भव्य जिनालय ग्वालियर जैन समाज का ही नहीं अपितु समस्त भारतवर्ष के दिगंबर जैन समाज की अमूल्य धरोहर है ! जिसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी हम सभी की है ! अतः इसकी रक्षा का संकल्प लेकर तन-मन-धन से सहयोग करें ताकि इस एतिहासिक धरोहर को आने वाली पीड़ियों केलिए सुरक्षित रखा जा सके !

 
  Images Gallery
 
  Darshan Timings
bullet दर्शन: - 6 AM TO 12 :30 PM . 5 PM .TO 9 PM
bullet अभिषेक: - मूलनायक प्रतिमा अभिषेक : 7 :30 AM
bullet पूजन: - 7 :45 TO 9 :30 AM
bullet प्रवचन: - 8 :30 AM TO 9 :30 AM एवं 8 PM TO 9 PM
bullet आरती: - 6 PM
 
 
Home | Site Map | Feedback | FAQ | Privacy Policy | Contact Us |
© 2013 Shree Digamber Jain Bada Mandir